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GST इनवॉइस कैसे बनाएं: फॉर्मेट, नियम और उदाहरण

हर GST इनवॉइस में ज़रूरी जानकारी, CGST + SGST या IGST कब लगेगा, और सही इनवॉइस बनाने का स्टेप-बाय-स्टेप तरीका।

Gaddibook Team · · 4 मिनट में पढ़ें

GST में रजिस्टर्ड हर बिज़नेस को हर टैक्सेबल बिक्री पर सही टैक्स इनवॉइस देना होता है। कोई ज़रूरी जानकारी छूट जाए या गलत हो, तो खरीदार का इनपुट टैक्स क्रेडिट अटक सकता है, और यह परेशानी आखिर में आपके पास ही लौटती है। इस गाइड में जानिए GST इनवॉइस में क्या होना चाहिए और इसे सही तरीके से कैसे बनाएं।

GST इनवॉइस किसे देना होता है?

अगर आप GST में रेगुलर टैक्सपेयर के रूप में रजिस्टर्ड हैं, तो हर टैक्सेबल बिक्री पर टैक्स इनवॉइस देना ज़रूरी है।

  • कंपोज़िशन डीलर टैक्स इनवॉइस की जगह बिल ऑफ सप्लाई देते हैं और उस पर GST नहीं ले सकते।
  • छूट वाले (exempt) या nil-rated सामान पर भी बिल ऑफ सप्लाई दिया जाता है।
  • ₹200 से कम की B2C बिक्री पर, अगर ग्राहक इनवॉइस न मांगे, तो दिन के अंत में एक कंसोलिडेटेड इनवॉइस बनाया जा सकता है।

GST इनवॉइस में क्या-क्या ज़रूरी है

CGST नियमों का नियम 46 बताता है कि टैक्स इनवॉइस में ये जानकारी होनी चाहिए:

जानकारीक्या लिखें
आपकी जानकारीबिज़नेस का नाम, पता और GSTIN
इनवॉइस नंबरवित्त वर्ष के लिए यूनिक और लगातार नंबर (16 अक्षर तक)
इनवॉइस की तारीखजिस दिन इनवॉइस जारी हुआ
खरीदार की जानकारीनाम, पता और GSTIN (अगर खरीदार रजिस्टर्ड है)
प्लेस ऑफ सप्लाईराज्य का नाम और स्टेट कोड
HSN या SAC कोडहर सामान या सेवा के लिए
विवरण, मात्रा और यूनिटजैसे: सनफ्लावर ऑयल 1 L, 10 PCS
टैक्सेबल वैल्यूडिस्काउंट के बाद की कीमत
टैक्स रेट और राशिCGST + SGST, या IGST, अलग-अलग दिखाएं
इनवॉइस टोटलअंकों और शब्दों में
रिवर्स चार्जटैक्स रिवर्स चार्ज पर देय है या नहीं
हस्ताक्षरआपके या अधिकृत व्यक्ति के हस्ताक्षर या डिजिटल हस्ताक्षर

बिना रजिस्ट्रेशन वाले खरीदार को ₹50,000 या उससे ज़्यादा की बिक्री पर, खरीदार का नाम-पता और डिलीवरी का पता (राज्य के नाम और कोड के साथ) भी लिखें।

CGST + SGST या IGST?

टैक्स इस बात पर निर्भर करता है कि सामान कहां जा रहा है:

  • उसी राज्य में (intra-state): टैक्स को बराबर CGST और SGST में बांटें। 18% वाला सामान = 9% CGST + 9% SGST।
  • दूसरे राज्य में (inter-state): पूरा टैक्स IGST के रूप में लगाएं।

GST इनवॉइस बनाने का तरीका, स्टेप-बाय-स्टेप

  1. सही डॉक्यूमेंट चुनें: टैक्स इनवॉइस, बिल ऑफ सप्लाई, या रिटर्न के लिए क्रेडिट नोट।
  2. इनवॉइस सीरीज़ का अगला नंबर इस्तेमाल करें। एक वित्त वर्ष में कोई नंबर न छोड़ें और न दोहराएं।
  3. खरीदार का नाम-पता डालें, और B2B बिक्री में उनका GSTIN। नए ग्राहक का GSTIN GST पोर्टल पर जांच लें।
  4. हर सामान को HSN कोड, मात्रा, यूनिट और रेट के साथ जोड़ें।
  5. डिस्काउंट टैक्स से पहले लगाएं, ताकि टैक्सेबल वैल्यू सही हो।
  6. टैक्स जोड़ें: अपने राज्य में CGST + SGST, दूसरे राज्य के लिए IGST।
  7. टोटल जांचें, राशि शब्दों में लिखें और हस्ताक्षर करें।
  8. ओरिजिनल कॉपी खरीदार को दें और अपनी कॉपी संभाल कर रखें।

उदाहरण

कोलकाता की एक दुकान कोलकाता के ही रजिस्टर्ड खरीदार को ₹500 के 10 यूनिट बेचती है। सामान पर 18% GST है।

विवरणराशि
टैक्सेबल वैल्यू (10 × ₹500)₹5,000
CGST @ 9%₹450
SGST @ 9%₹450
इनवॉइस टोटल₹5,900

अगर यही खरीदार बिहार में होता, तो इनवॉइस पर IGST @ 18% = ₹900 दिखता, और टोटल फिर भी ₹5,900 ही होता।

22 सितंबर 2025 से कई सामानों की GST दरें बदली हैं, इसलिए आइटम लिस्ट बनाते समय हर प्रोडक्ट की मौजूदा दर ज़रूर जांचें।

कितनी कॉपी चाहिए?

  • सामान (goods): तीन कॉपी। ओरिजिनल खरीदार के लिए, डुप्लिकेट ट्रांसपोर्टर के लिए, और ट्रिप्लिकेट आपके पास।
  • सेवाएं (services): दो कॉपी। ओरिजिनल खरीदार के लिए और डुप्लिकेट आपके पास।

क्या आपको ई-इनवॉइसिंग चाहिए?

अगर 2017-18 के बाद किसी भी वित्त वर्ष में आपका कुल सालाना टर्नओवर ₹5 करोड़ से ज़्यादा रहा है, तो आपके B2B इनवॉइस इनवॉइस रजिस्ट्रेशन पोर्टल (IRP) पर रिपोर्ट होने चाहिए और उन पर IRN और QR कोड होना चाहिए। छोटे बिज़नेस सामान्य इनवॉइस देते रह सकते हैं।

आम गलतियां जिनसे बचें

  • B2B इनवॉइस पर खरीदार का GSTIN गलत या गायब, जिससे खरीदार इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं ले पाता
  • HSN कोड न लिखना। हमारी गाइड पढ़ें: GST इनवॉइस पर HSN कोड
  • इनवॉइस नंबर सीरीज़ में गैप या दोहराव
  • inter-state बिक्री पर CGST + SGST लगाना
  • डिस्काउंट से पहले की कीमत पर टैक्स लगाना

Gaddibook से GST इनवॉइस जल्दी बनाएं

Gaddibook में आपकी बिज़नेस जानकारी, आइटम लिस्ट और HSN कोड पहले से तैयार रहते हैं, इसलिए हर इनवॉइस मिनटों की जगह सेकंडों में बनता है। आपके इनवॉइस फाइलिंग के समय ज़रूरी GST रिपोर्ट्स में भी काम आते हैं। देखें Gaddibook POS बिलिंग, पढ़ें GSTR-1 कैसे फाइल करें, या प्राइसिंग देखें।