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ई-वे बिल के नियम: कब चाहिए और कैसे बनाएं

ई-वे बिल कब चाहिए, कितने समय तक वैलिड रहता है, और ई-वे बिल पोर्टल पर इसे स्टेप-बाय-स्टेप कैसे बनाएं।

Gaddibook Team · · 4 मिनट में पढ़ें

ई-वे बिल एक इलेक्ट्रॉनिक डॉक्यूमेंट है जो एक तय वैल्यू से ज़्यादा का सामान भेजने के लिए ज़रूरी है। इसके बिना सामान और गाड़ी रोकी जा सकती है और पेनल्टी लग सकती है। अगर आप डिस्ट्रीब्यूटर या होलसेलर हैं और रोज़ माल भेजते हैं, तो ये नियम ज़रूर जानें।

ई-वे बिल कब चाहिए?

जब आप एक कंसाइनमेंट में GST मिलाकर ₹50,000 से ज़्यादा का सामान भेजते हैं, तब ई-वे बिल ज़रूरी है। यह लागू होता है:

  • बिक्री पर, अपने राज्य के अंदर भी और दूसरे राज्यों में भी
  • खरीद रिटर्न और अपनी ब्रांचों के बीच स्टॉक ट्रांसफर पर
  • जॉब वर्क, अप्रूवल पर भेजे गए सामान और ऐसी दूसरी आवाजाही पर

कुछ राज्यों में राज्य के अंदर आवाजाही की सीमा ज़्यादा है, इसलिए अपने राज्य का नियम देख लें।

कब ज़रूरी नहीं है?

  • कंसाइनमेंट वैल्यू ₹50,000 तक हो, सिवाय कुछ खास मामलों के, जैसे inter-state जॉब वर्क और हैंडीक्राफ्ट सामान
  • सामान बिना मोटर वाली गाड़ी, जैसे हाथ ठेले, से जा रहा हो
  • GST से छूट वाला सामान, जैसे ताज़े फल और सब्ज़ियां

पार्ट A और पार्ट B

पार्टइसमें क्या होता हैकौन भरता है
पार्ट Aखरीदार का GSTIN, डिलीवरी की जगह, इनवॉइस नंबर और तारीख, वैल्यू, HSN कोड और भेजने का कारणसप्लायर, खरीदार या ट्रांसपोर्टर
पार्ट Bगाड़ी का नंबर, या रेल, हवाई या जहाज़ के लिए ट्रांसपोर्ट डॉक्यूमेंट नंबरजो सामान ले जा रहा है

ई-वे बिल पार्ट B भरने के बाद ही इस्तेमाल हो सकता है। अगर सामान उसी राज्य में आपके बिज़नेस से ट्रांसपोर्टर तक, या ट्रांसपोर्टर से खरीदार तक 50 km के अंदर जा रहा है, तो पार्ट B ज़रूरी नहीं।

ई-वे बिल कितने समय तक वैलिड है?

माल का प्रकारवैलिडिटी
सामान्य मालहर 200 km या उसके हिस्से के लिए 1 दिन
ओवर-डाइमेंशनल मालहर 20 km या उसके हिस्से के लिए 1 दिन

हर दिन रात 12 बजे खत्म होता है। उदाहरण: सोमवार रात 10 बजे 150 km की यात्रा के लिए बना ई-वे बिल मंगलवार रात 12 बजे तक वैलिड रहेगा।

अगर सामान समय पर नहीं पहुंच सकता, तो खत्म होने से 8 घंटे पहले से 8 घंटे बाद तक वैलिडिटी बढ़ाई जा सकती है।

ई-वे बिल कैसे बनाएं

  1. ई-वे बिल पोर्टल (ewaybillgst.gov.in) पर लॉग इन करें।
  2. E-waybill → Generate New पर जाएं।
  3. ट्रांज़ैक्शन टाइप (आउटवर्ड या इनवर्ड), सब-टाइप (जैसे सप्लाई) और डॉक्यूमेंट टाइप (जैसे टैक्स इनवॉइस) चुनें।
  4. डॉक्यूमेंट नंबर और तारीख, खरीदार का GSTIN और पता, और HSN कोड व वैल्यू के साथ आइटम की जानकारी डालें।
  5. ट्रांसपोर्टर की जानकारी और अनुमानित दूरी डालें।
  6. पार्ट B में गाड़ी का नंबर भरें, या इसे ट्रांसपोर्टर के अपडेट करने के लिए छोड़ दें।
  7. Submit पर क्लिक करें। आपको 12 अंकों का ई-वे बिल नंबर (EBN) मिलेगा। इसे ड्राइवर को भेजें या प्रिंट करें।

अगर आप ई-इनवॉइस बनाते हैं, तो IRN के साथ ही ई-वे बिल बना सकते हैं, जिससे जानकारी दो बार नहीं डालनी पड़ती।

ई-वे बिल बदलना या कैंसल करना

  • गाड़ी बदलना: रास्ते में सामान दूसरी गाड़ी में जाए तो पार्ट B अपडेट करें।
  • कैंसल: बनने के 24 घंटे के अंदर, अगर सामान नहीं भेजा गया और किसी अधिकारी ने बिल जांचा नहीं है।
  • बनने के बाद पार्ट A एडिट नहीं हो सकता। उसे कैंसल करके नया बनाएं।

बिना ई-वे बिल के सामान भेजने पर पेनल्टी

अगर सामान बिना वैलिड ई-वे बिल के जा रहा है, तो अधिकारी सामान और गाड़ी दोनों रोक सकते हैं। न्यूनतम पेनल्टी ₹10,000 या उसमें शामिल टैक्स, जो भी ज़्यादा हो, है, और रोके गए सामान को छुड़ाने में इससे कहीं ज़्यादा लग सकता है।

आम गलतियां

  • पार्ट B में गलत गाड़ी नंबर
  • ई-वे बिल की वैल्यू या HSN कोड इनवॉइस से मेल न खाना
  • लंबी यात्रा में ई-वे बिल की वैलिडिटी खत्म हो जाना
  • ब्रांचों के बीच स्टॉक ट्रांसफर पर ई-वे बिल भूल जाना

Gaddibook से बिलिंग और डिस्पैच

Gaddibook आपके इनवॉइस, HSN कोड और खरीदारों की जानकारी एक जगह रखता है, ताकि ट्रक निकलने से पहले ई-वे बिल की हर जानकारी तैयार रहे। देखें डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए Gaddibook, पढ़ें GST इनवॉइस कैसे बनाएं, या प्राइसिंग देखें।